जिन बुलाने का आसान तरीका


जिन्न को बुलाने का तरीका

हमने आजकल आपको बताया है कि हो सकता है कि किसी को भी जन्नत छोड़ जिन्न को बुलाने का तरीका
– अगर आपको जिन्न को बुलाना हैं तो सबसे पहले आपको पाक होना पड़ेगा उसके बाद ही आप जीन को बुला या पा सकते है

जिन्न को बहुत लोग पाने की कोशिश केते है लेकिन वो न सफल रह जाते है क्युकी उन्हें पता नहीं होता है|
तो हम आपको बताते है जीन को पाने तरीका।
१. आप का बदन पाक होना चाहिए।
२. जीन की आयात होती ह वो आपको आणि चाहिए।
३. वाइज़फा होता हैं वो आना चाहिए।
४. एक इसके लिए अलग से नवाज़ होती वो आपको किसी हाजी जी से मौलाना जी से करवानी पड़ेगी।

अल्लाह हाफिज

जिन्न को बुलाने का तरीका –

इस्लाम में जिन को कॉल करने के लिए काले जादू का बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है। यदि आप काले जादू में विशेषज्ञ हैं, तो इस मामले में आप जीन के बारे में बहुत सफलतापूर्वक जानते हैं क्योंकि जिन्देल हमारे शत्रुओं को असहाय बनाने के लिए सबसे मजबूत माध्यम के रूप में खड़ा है। आम तौर पर, लोग इसका इस्तेमाल अपने जादू, निवेश वसूली, प्रेम, आवास के उद्देश्य से करते हैं, यह उद्देश्य जीन हमारा लक्ष्य हासिल करने का सर्वोत्तम विकल्प है। संभवत: इंसान के साथ जिन्न इंटरफेस के संबंध में कई कारण हो सकते हैं लेकिन जिन्दन के संबंध में उद्देश्य जरूरी है कि बिना किसी कारण के लिए जिन्न हर किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकती है|

ने के अलावा काले जादुई का उपयोग करने पर बदला लेने, बदला लेने की तरह कोई भी हो, तो आम तौर पर तीन अवसर मिलते हैं। सबसे पहले, जिन्न तुम्हारे भीतर हो सकती है, दूसरे के भीतर, जिन्न शरीर से बाहर हो सकती है, और तीसरी जिन्न जिन्द बाहरी हो सकती है, लेकिन इस रिपोर्ट के साथ जीन की इच्छा के साथ जाइए।

इस्लाम में जिन को बुलाओ

सामान्य लोगों को जिन्नों के बारे में पता नहीं है इसलिए काले जादू व्यवसायी यह काम करते हैं। दरअसल, कुछ लालची व्यक्ति काला जादू विशेषज्ञ के लिए प्रत्येक आकर्षक पेशकश प्रदान करता है, वे अपनी भावनाओं में बेवकूफ हो रहे हैं, और तैयार करने में मदद कर रहे हैं ताकि इन सरल उपयोगों में से एक जीन की तरह उनके दृष्टिकोण का उपयोग करें। कि वे व्यक्ति के बाद की मांग पर आवेदन कर सकते हैं और कुछ दिनों बाद जल्द ही, परिणाम प्राप्त करने के बाद से वे चाहते हैंजैसा कि

जिन्न को बुलाने का तरीका

इसलिए अब सभी लोग डराने लगे हैं कि जीन को हटाने का सबसे अच्छा तरीका है, जीन से साफ रहें क्योंकि उन्हें इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल सकती है ताकि वे यह न जान सकें कि जीन को फोन करने का सबसे अच्छा तरीका या सबसे अच्छा तरीका है। आपके आगंतुकों के लिए यह बहुत अच्छी जानकारी नहीं लेती है कि हम में से अधिकांश ने कुछ इस्लामी दृष्टिकोण लाए हैं, जो जिन्न से जुड़े सभी प्रकार से छुटकारा पाने के योग्य हैं। इसलिए सुनिश्चित करें कि आप हमारे वेब पेज पर जाएं। इसके अलावा, यदि आप गंभीरता से सेवाओं में रुचि रखते हैं तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं हम आप निश्चित रूप से करने के लिए अनुमति देता है

इसके अलावा आप जिन्न को रिकार्ड करने में मदद करने के लिए संपर्क प्राप्त कर सकते हैं या अपने आप को जीन से बचा सकते हैं। यह इस्लाम में जिन्न प्राप्त करना और जिन्न से बचने या देखने के लिए हम सबके साथ संपर्क कर सकते हैं और सब कुछ जम्मू से समर्थन प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।

जिन के लिए दुआ


जिन को काबू में करने का अमल

जिन को काबू में करने का अमल – Jin Ko Kabu Me Karne Ka Amal, Tarika, Wazifa, Dua, जिन खुदा ने धुए से बनाया है, वो हर वो काम कर सकता है जो इंसान नहीं कर सकता, इसलिए आज हम आपको जिन से दोस्ती करने का अमल और जिन को बुलाने का अमल बता रहे है. यदि किसी कारन से आप जिन से परेशान है तो आप हमारा जिन से निजात पाने का वजीफा भी जरूर पढ़े.

Jin Ko Kabu Me Karne Ka Amal

जिन मुस्लिम रूह होती है, जो आम तौर पर अदृश्य है और इसमें मानवों से परे कई आध्यात्मिक शक्तियां हैं। इस्लाम के मान्यता के अनुसार ऐसे लोग, जिनकी इच्छाये पूरी नहीं होते, वो मरने पर हजारों-लाखो वर्षों तक भटक कर जिन्न बन जाते हैं|

जिन को काबू में करने का अमल – Jin Ko Kabu Me Karne Ka Amal, Tarika, Wazifa, Dua

अवं जिन, नर और मादा दो प्रकार के होते हैं और उन्हें उनकी शक्तियों और प्रकार के आधार पर कई रूपों में वर्गीकृत भी किया जाता है। इन्हे क़ाबू में करने के लिए नीचे दिये हुए अमल को आजमाना चाहिए:-

यदि किसी जिन्नात ने महिला को कब्जे में कर लिया हैं, तो ये महिला वैसे भी इस जिन्नात को अपने शरीर से बाहर निकालने में सक्षम नहीं होगी क्यूंकी उसके शरीर के साथ-साथ उसके दिमाग पर जिन्न ने कब्जा कर लिया गया है और वह इसके पूर्ण नियंत्रण में होगी।
वह सब कुछ महसूस कर रही होगी लेकिन इससे छुटकारा नहीं पा सकेगी। वह इस जिन्न के कहे अनुसार ही सब कार्यों को करेगी| इस दौरान वो अपनों को भी नहीं पहचानेगी|
ऐसी स्थिति में इस जिन्न को क़ाबू में करने के लिए अल्लाह- ताला का नाम लेकर एक चाकू से सुरक्षा घेरा महिला के चारों ओर बना दे| पास के किसी मस्जिद से पवित्र जल पहले से मँगवा कर रख ले|
अब महिला के सामने बैठ कर सुरते-अलहशिरी का पाठ 100 मर्तबा करे| हर बार पाठ पूर्ण होने पर महिला की पेशानी और मस्जिद से लाये पवित्र जल दोनों पर बारी-बारी से फूँक मारे|
पाठ खत्म करने के बाद मस्जिद के पवित्र जल को महिला के ऊपर छिड़क दे| ध्यान रहे यह सब करते हुए महिला उस सुरक्षा घेरे के अंदर ही बैठी हों|
इस पवित्र जल के पड़ते ही वो जिन्नात महिला के शरीर को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएगा| इस तरह से आप एक जिद्दी जिन्नात को क़ाबू करने में सफल हो जाएंगे|


जिन से दोस्ती करने का अमल


जिन से दोस्ती करने का अमल – Jinn Se Dosti Karne Ka Amal, Tarika, Wazifa, Dua, आज के आधुनिक समाज भले ही जिन्न के अस्तित्व को नकार दें| परंतु सच तो यह हैं कि ये किसी को भी अपने वश में कर के उससे कुछ भी करवा सकते हैं|

यह सचमुच बहुत खतरनाक होते हैं|मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार अधिकांशत: जिन्न मानव को हानि ही पहुंचाते हैं, इनमें बहुत कम ऐसे होते हैं, जो मित्रवत व्यवहार करते हैं|

जिन्न को काबू में करने के लिए कई वजीफों और दुआओं का वर्णन इस्लाम में किया गया हैं, जिन्हे पाक दिल से पढ़ने पर इन जिन्नों को काबू में किया जा सकता हैं|आइये हम जिन्न से दोस्ती करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अमलों और दुआओं के बारे में जानते हैं:-

Jinn Se Dosti Karne Ka Amal

जिन्नात से दोस्ती करना इतना भी आसान नहीं हैं| इस प्रक्रिया में 6 से 7 घंटे का समय लग जाता हैं| परंतु यह भी उतना ही सच हैं कि यदि आप एक बार जिन्न से दोस्ती करने में सफल हो जाते हैं, तो ये जिन्न आपको माला-माल कर देगा|
इस अमल को करने के लिए आपको एक सफ़ेद चादर, सफ़ेद फूल, सफ़ेद लिबास और इत्र की अवश्यकता होगी| सबसे पहले जुम्मे के रात करीब 12 बजे के आस-पास सफ़ेद लिवास पहन कर सफ़ेद चादर बिछा कर बैठ जाए| अब अपने चरो ओर सफ़ेद फूल का घेरा बना ले|इस घेरे के अंदर बैठ कर अपने दोनों हाथों को उठा कर यह दुआ 100 मर्तबा पढ़े:- “ए नेक दिल जिन्नात, तू यदि मेरी सुन रहा हैं, तो मेरे बनाए इस घेरे में आ कर मुझे अपनी मौजूदगी का अहसास दिला|”
आप इस दुआ को लगातार पढ़ते रहे और सुगंधित इत्र का छिड़काव अपने चारों ओर थोड़ी थोड़ी देर में करते रहे| इत्र की खुशबू और आपकी दुआओं के असर से नेक दिल जिन्नात आपके बनाए घेरे में आ जाएंगे|
अब आप जो भी कामना पूरी करने की इच्छा रखते हैं, वो इस जिन्न से कहे| यह अपनी शक्तियों से आपकी हर इच्छा को पूरा करेगा|

जिन को बुलाने का अमल

जिन को बुलाने का अमल – Jinn Ko Bulane Ka Amal, Tarika, Wazifa, Dua, जिन्न का अस्तित्व हैं और यह पवित्र कुरान की आयतों से सिद्ध होता है। टोना-टोटका, कालिख पोतने वाले और भाग्यशाली बनाने वालों की शरण लेना विश्वास में कमजोरी से कम नहीं है।

भौतिक दुनिया के क्षेत्र में अपनी प्रगति और सफलता के कारण पश्चिमी लोगों ने अपना ध्यान इससे हटा दिया है, लेकिन भारत और पाकिस्तान के मुसलमान ज्ञान को प्राप्त करने के बाद भी इस पर यकीन करते हैं,

और यह यकीन ही जिन्नों के होने का प्रमाण हैं| जिन्न को बुलाने के लिए बहुत से दुआओं और अमलों का इस्त्माल होता हैं, जिनमें से कुछ नीचे दिये हुए हैं:-

Jinn Ko Bulane Ka Amal

कुरान के अनुसार, अल्लाह ने जिन्न के साथ-साथ स्वर्गदूत और इंसान भी बनाए हैं। जिन्न में विश्वास अपेक्षाकृत व्यापक है – 23 में से 13 देशों में जहां सवाल पूछा गया था, आधे से अधिक मुस्लिम इन अलौकिक प्राणियों में विश्वास करते हैं। आप जब भी मुसीबत में हों, तो जिन्नात की मदद पाने के लिए इस दुआ को 21 मर्तबा पढे:-
अब्दुल्लाहे रहीम, वज़ूरेकरिन, वाकेतुल्लाह वसीम अख़्तियार नम्ज नब्बेदीना अल्लाहू रहीम|”
इस वजीफ़ा को पढ़ने से जिन्नात आपसे खुश होते हैं, और आपकी पुकार पर मदद के लिए आ जाएंगे| ध्यान रहे ये सारी प्रक्रिया बहुत ही एहतियात से करनी चाहिये| कही ऐसा न हो जाए कि कोई दुष्ट जिन्न आपकी पुकार पर आजाए| ऐसे जिन्न बहुत जिद्दी होते हैं और जल्दी से आपका पीछा नहीं छोड़ते हैं|
जुम्मे कि रात खुले आसमान के नीचे बैठ कर कुराने पाक का पाठ करने के बाद यदि आप सच्चे दिल से जिन्नात को अपनी मदद करने के लिए आवाज़ लगते हैं, तो नेक दिल जिन्नात अवश्य ही आपकी मदद के लिए आएंगे|
ऐसे जिन्न बहुत ही मित्रवत व्यवहार करते हैं, और अपनी आकाओं का हर कहा मानते हैं| अच्छी बात यह हैं, कि आप इन्हे जब चाहे इन्हे, इनकी दुनिया में लौट जाने को कह सकते हैं|

जिन से निजात पाने का वजीफा

जिन से निजात पाने का वजीफा – Jinn Se Nijat Pane Ka Wazifa, Taweez, Amal, Tarika, Dua, यदि जिन्न ने किसी के शरीर पर कब्जा कर लिया हैं, तो उससे निजात पाना बहुत ही मुश्किल होता हैं|

इस कार्य को अंजाम देने के लिए आप किसी मौलवी से संपर्क करे और उनके बताए हुए अमलों और वजीफों का प्रयोग कर इससे छुटकारा पाये|जिन से निजात पाने के लिएमौलवी द्वारा बताया गया वजीफ़ा कुछ इस प्रकार से प्रयोग कर सकते हैं:-

आम तौर पर लोग पुरुष जिन्न से प्रभावित होते हैं | दुष्ट पुरुष जिन्न या जिन्नात बहुत जिद्दी होता है और यदि महिला को कब्जे में ले लेता हैं, तो उसे आसानी से नहीं छोड़ता है।
कई बार ये जिन किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा आपको कब्जे में करने के मंसूबे से भेजे जाते हैं|जिन्न के कब्ज़े से प्रभावित व्यक्ति बहुत कमजोर हो जाता हैं और उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम नहीं करता हैं| उसकी मेडिकल रिपोर्ट तो सामान्य होगी लेकिन वह असामान्य होगा|

Jinn Se Nijat Pane Ka Wazifa


ऐसे अदृश्य ताकतों से छुटकारा हमें अल्लाह-ताला की कृपा से ही प्राप्त हो सकता हैं| अपने दोनों हाथ उठा कर खुदा से दुआ करें और इस वजीफा को 1000 मर्तबा पढे:- “रब्बाना इरफ़ान अन्ना अज़ाबा जहन्नम इन्ना अजबहा कह गरामा मन्नाकरन मुन्नामा में इन्ना सा करीम|”

अर्थ- ” ओ मेरे खुदाया! नर्क की सजा हमसे दूर करो,निश्चित रूप से सजा स्थायी (66) है, निश्चित रूप से यह एक बुराई का निवास है और मेरा शरीर (रहने के लिए) जगह हैं, लेकिन तू तो गरिबनवाज़ हैं, मुझे इस दोज़ख से निकाल|”

इस दुआ के पूरा होते- होते जिन्नात रोगी का शरीर छोड़ कर चला जाएगा और फिर कभी नहीं लौटेगा|
इस अमल को बिना किसी जानकार के दिशा-निर्देश के बिना ना करे, क्यूंकी गड़बड़ी होने पर रोगी की जान भी जा सकती हैं|
कुरान और हदीस दोनों ही जादू टोना और बुरी नजर के साथ-साथ अरबी में जिन्न (अंग्रेजी शब्द जिन्न की उत्पत्ति) के रूप में जाने जाने वाले अलौकिक प्राणियों के संदर्भ में अमल बताते हैं| यदि आपको अल्लाह पर भरोसा हैं, तो यह उपाय निश्चय ही काम करेगा, यकीन मानिये|

सूरह कौसर का तर्जुमा


Surah kausar – In Hindi With Tarjuma | सूरह कौसर हिंदी में तर्जुमा के साथ

Surah kausar – In Hindi With Tarjuma सूरह कौसर हिंदी में तर्जुमा के साथ सूरह कौसर मक्का शरीफ में नाजिल हुआ और इसमें कुल तीन आयतें है नाजरीन अपने तिलावत के दरमियान या फिर नमाज़ के दरमियान surah Kausar के बारे में बहुत पढ़ा होगा लेकिन इस सूरह के जरिये जो पैगाम मोमिनो को दिया गया है उसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे|Surah Kausar

In English

Inna Aatayna kal Kausar

Fasalli Lirabbika Wanhar

Inna Shaniaka Huwal Abtar

Hindi Mein

इन्ना आतय नाकल कौसर

फसल्लि लिरब्बिका वन्हर

इन्ना शानिअका हुवल अब्तर

Tarjuma Surah kausar in Hindi

बेशक हमने आपलोगो को कौसर अता फरमाई है

तो क्यों न आप अपने परवर दिगार के लिए नमाज़ पढ़ा करें और कुर्बानियां किया कीजिये

यकीनन ही आपका दुश्मन ही हमेशा बे नामो निशान रहेगा

Surah Kausar Ki Tafseer

दोनों जहाँ के मालिक हमारे प्यारे नबी पाक सल्लाल लाहू अलैहि वसल्लम की बीवी हज़रत खदीजा र.अ. से दो बेटे और चार बेटियां पैदा हुए बेटियां तो जिंदा रहीं लेकिन दोनों साहबजादे जिनका नाम कासिम और दुसरे का नाम अब्दुल्ला था बचपन में ही उन दोनों वफात पा गए फिर मदनी ज़िन्दगी में आपकी बांदी हज़रत मारिया किब्तिया से हज़रत इब्राहीम पैदा हुए और वो भी बचपन में वफात फरमा गए |

दोनों बेटों के बाकी न रहने में गालिबन अल्लाह की ये हिकमत थी कि आम तौर से एक पैगम्बर के बाद उसकी औलाद को पैगम्बरी से नवाज़ा जाता था जबकि रसूलुल (S.A.W) पर नबियों का सिलसिला ख़त्म हो चूका है तो अगर बेटे जिंदा रहते तो वहां के लोग ग़लतफ़हमीके शिकार हो जाते और जिन लोगों के दिलों में इफरात व ताफरीत थी वो इस किस्म का मसला खड़ा कर सकते थे इसलिए अल्लाह तआला के तरफ से ही बेटों में से कोई औलाद दुनिया में बाकी नहीं रखी गयी |

Surah Kausar

सूरह कौसर कब नाजिल हुआ

जिस किसी इंसान का का औलादें लड़की ( लड़का ) अगर जिंदा न रहे तो अरब के लोग उसे अब्तर कहा करते थे और ये सब गुमान रखा करते थे क्यू कि मरने के बाद वे इंसान बे नामो निशान रह जाता है और कोई उसका नाम लेने वाला नहीं होता इसलिए जब नबी पाक (S.A.W.) के दोनो साहब ज़ादों का वफ़ात हुआ तो मक्का के मुशरिकीनो में एक तरह की ख़ुशी की लहर दौड़ गयी और उसी दरमियान ये सूरत surah kausar नाजिल हुआ |

इस सूरह में दो अहकाम और दो खुसखबरी


पहली खुसखबरी

अल्लाह तआला के तरफ से पहली खुशखबरी ये है की हम ने आप सब को कौसर अता फ़रमाया कौसर का मानी कसीर शय यानी बहुत ज्यादा चीज़ के हैं लेकिन यहाँ हज़रत अनस र.अ. से रिवायत है कि कौसर जन्नत की एक नहर है | एक बात और है जो कौसर के सिलसिले में आई है वो ये कि एक हौज़ होगा जिस पर रसूल पाक स.अ. की उम्मत आयेगी और उसमें पानी लेने के लिए बर्तन सितारों की तादाद में होंगे |

दूसरी खुशखबरी


और दूसरी खुशखबरी ये है कि इस्लाम के यानि काफिर दुश्मन कहते हैं कि आप का नामो निशान मिट जायेगा लेकिन हकीकत तो ये है कि आप का नामो निशान क़यामत तक इन्शाह अल्लाह बाकी रहेगा हाँ आपके दुश्मनों के नाम बेशक मिट जायगा |

और आज इस हकीकत को यक़ीनन देखा जा सकता है कि रात और दिन का कोई ऐसा लम्हा नहीं जिसमें ईमान वाले अपने प्यारे नबी स.अ. पर दुरूदो सलाम न भेज रहे हों और आप के पैगम्बर होने की गवाही न दे रहे हों , आज दुनिया के एक अरब से ज्यादा लोगो के लिए सब से ज्यादा महबूब और प्यारा सच्चा और पक्का नाम मुहम्मद स.अ. का नाम है |

अल्लाह के तरफ से दो बातो का हुक्म दिया गया

  1. पहला नमाज़ पढ़ने का हुक्म

बालिग और समझदार को 5 वक़्त की नमाज़ पढ़ना जरुरी है और फ़र्ज़ भी

  1. दूसरा हुक्म कुर्बानी देना

कुर्बानी असल में तो ऊँट के ज़बह करने को कहते हैं लेकिन बाज़ औकात हर जानवर के जिबह करने को नहर से ही ताबीर करते हैं |

अल्लाह तआला ने इन अहकामो के ज़रिये इस हकीकत के तरफ इशारा किया है कि दुश्मन यानी काफिर से निजात पाने और और उनके मंसूबों को नाकाम बनाने का गैबी नुस्खा सिर्फ और सिर्फ नमाज़ और कुरबानी है |

अगर आपको इसके बारे में और जानना हैं तो Deenibaatein.com Link पर Click करें

नाजरीन कैसी ले आपको ये इस्लामिक मालूमात अगर आपको ये अच्छा लगा हो तो plz इसे शेयर जरूर करें

सूरह कौसर की तिलावत


हर ख्वाहिश के लिए सूरह कौसर का वजीफा

हर ख्वाहिश के लिए सूरह कौसर का वजीफा – Har Khwaish Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa, Amal, Dua, हर इंसान के मन मे कोई न कोई ख्वाहिश होती है, आज हम इसके लिए आपके बतायेगे मोहब्बत के लिए सूरह कौसर का वजीफा और दुश्मन के लिए सूरह कौसर का वजीफा। इसके अलावा आप के लिए लाये है औलाद के लिए सूरह कौसर का वजीफा।

Har Khwaish Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa

अगर आप सूरह कौसर का वजीफा करना चाहते हैं।तो हम आपकीखितमत में हाजिर है।वजीफा बेहद ही आसान और पावरफुल है।बहुत ही छोटी सी आयत है इसकी बहुत सीफजीलत है।छोटी सी आयत में पूरे कायनात को समेटा हुआ है बहुत ही फजीलत है।

हर ख्वाहिश के लिए सूरह कौसर का वजीफा

आपका कोई काम ना हो रहा हो तो सूरह कौसर का अमल करें।अपने काम कोआसान करें।इंसान के दिल में एक नहीं हजार ख्वाहिश होती है और उन्हें ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए हमें अपनी हर जद्दोजहद कोशिशें करनी चाहिए।

जिससे हम अपनी ख्वाहिशों को पा सके और अपने हाथों में कामयाबी को हासिल कर ले।लेकिन हमको कहीं ना कहीं नाकामी मिल जाए।तो हमें परेशान नहीं होना चाहिए।हमें अपनी ख्वाहिश को नहीं छोड़ना चाहिए।इस ख्वाहिश को हमेशा

अपने दिल में बसाना चाहिए। यही ख्वाहिश एक दिन हम को कामयाब जरूर करती है। ख्वाहिश ही हमारा सबसे बड़ा जुनून है जिसको हमें अपने दिल में रखना चाहिए।हम आपको हर ख्वाहिश के लिए सूरह कौसर का वजीफा बताते हैं

सादा वजीफा है इसकी बरकती बहुतसी है। इसवजीफे को आपको जुम्मे के दिन से शुरू करना है।आप जब तक चाहे इस वजीफे को कर सकते हैं।नमाज पढ़ने के बाद आपको 10 बार सूरह कौसर की तिलावत करनी होगी।

फिर अल्लाह रब्बुल इज्जत की हम्द दो सना करने के बाद अपनी ख्वाहिश के लिए दुआ करनी होगी।इंशाल्लाह आप इस वजीफे से बहुत ही कामयाब होंगे।जुम्मे का दिन बहुत ही फजीलतका दिन है।

मोहब्बत के लिए सूरह कौसर का वजीफा

मोहब्बत के लिए सूरह कौसर का वजीफा – Mohabbat Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa, Amal, Dua, एक रात का वजीफा है।1 दिन ही में आप अपनीमोहब्बत के दिल दिमाग परकब्ज़ा कर लेंगे।उसके दिल में मोहब्बतपैदा हो जायगी। इस वजीफे को लड़की या लड़का किसी की मोहब्बत हासिल करने के लिए करसकते हैं।

लेकिन मकसद नेक होना चाहिए।किसी को परेशान करना या सताना आपका मकसद नहीं होना चाहिए।आपवजीफाखुदकरें।किसी के पास जाने की जरूरत नहीं है खुद ही वजीफा कर सकते हैं।

अपनी किस्मत को खुदआजमाएंअल्लाह के कलाम से सब कुछ मुमकिन है।आपका इरादा पक्का हो तो आपको नाकामी कभी भी नहीं देखने को मिलती।बस आपको अपना इरादा पुख्ता रखना है।

इस वजीफे को करते वक्त आपको नियत पाक रखनी है याकीनकामिल के साथ आप इस वजीफे की शुरुआत करें हैं।अल्लाह ताला के रहमों करम से इंशाल्लाह जरूर कामयाबी हासिल होगी।

Mohabbat Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa

ईशा की नमाज के बाद आपको इस वजीफे को करना है।अव्वल आखिर 11/11 बार आपकोदरूद शरीफ पढ़नी है।आपको बावजू कमरे में अगरबत्ती खुशबू लगाना है।तीन बार अतल कुर्सी पढ़नीहै चारों कुल पढ़कर अपने जिस्म का आसार करने हैं।

साथ ही साथ इजाजत भी हासिल करनीहैं। इस वजीफे के लिए आपको 21 मिर्च लेनी है।अगर कोयले की आग में जाए तो ज्यादा बेहतर है।सारी मिर्चपर मुकम्मल पढ़ाई कर ले।

उसको अपने पास रखना है मिर्च को इकट्ठा जलाना है। 21 मिर्च पर 121 बार सूरह कौसर पढ़ना है और पढ़ कर मिर्च पर दम करना है।जहन में सबर और दुनिया के ख्यालात से पाकरखना है।आप इस वजीफे से जरूर कामयाब होंगे।

दुश्मन के लिए सूरह कौसर का वजीफा


दुश्मन के लिए सूरह कौसर का वजीफा – Dushman Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa, Amal, Dua, वजीफा दुश्मन से हिफाजत करने के लिए है।लेकिन आप इस से एक नहीं कई फायदा उठा सकते हैं।इस आयत की बहुत सारी फजीलत है।यह सूरह कौसर कुरान शरीफ की सबसे छोटी आयत शरीफ है।

बहुत ही मुबारक आयत है आपकी तमाम मुश्किलों को इंशाल्लाह दूर करेगी।अगर आप इस की तिलावत रोजाना करते हैं तो इसकी बहुत सारी फजीलत है इंशाल्लाह आपको यकीनन हासिल होगी। इस मुबारक आयतको अगर आप चाहे तो याद कर ले और जहन में बैठा ले।

और हर वक्त उल्टे बैठते चलते-फिरते पढ़ें इंशाल्लाह हर तरह से आपकीहिफाज़त रहेंगी।अगर आप दुश्मन से बचने के लिए इस वजीफे का अमल करना चाहते हैं।तो वजीफे को तहसील से समझे जिस भी मकसद के लिए आप इस वजीफे को करना चाह रहे उस मकसद को अपने जहन में बिठाले।

Dushman Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa

अपनी हर परेशानियों को इस वजीफे से दूर करें।सिर्फ और सिर्फ 3 दिन का आसान वजीफा है।इसकी मुद्दत 3 दिन की है जुम्मे के दिन से हफ्ते तक करना है यानी जुमेरातजुमहशनिवार।बड़ी से बड़ी परेशानियां इंशाल्लाह दुश्मन से फतेहहोंगी।

जुम्मे रात जब आप फजर की नमाज पढ़ ले।उसके बाद आपको 11/11 मर्तबा दुरु शरीफ और 129 बारसूरह कौसरपढ़नी है।उसी दिन असर की नमाज पढ़ने के बाद दोबारा इसी तरह आपको 11/11 बारदुरु शरीफ129 बार सूरह कौसरपढ़े।

ऐसे ही ईशा की नमाज के बाद 11/11 बारदुरु शरीफ129 बार सूरह कौसरपढ़े।इसी तरह 3 दिन लगातार इसवजीफे को तीनवक्त में करतेरहें।इंशाल्लाह आपका मकसद रद्द नहीं होगा।

औलाद के लिए सूरह कौसर का वजीफा

औलाद के लिए सूरह कौसर का वजीफा – Aulad Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa, Amal, Dua, वजीफा बहुत ही पावरफुल है।एक बार जरूर करें कई बार ऐसा होता है।कि शादी के सालों साल हो जाते हैं और आप औलाद की खुशी से महरुम रहते हैं।

शादीशुदा रिश्ते की कामयाबी और उसको मुकम्मल करने के लिए औलाद बहुत ही बड़ीनेमत है।लेकिन कुछ लोग इस औलाद की नेमत से महरुम रहते हैं।आप परेशान बिल्कुल भी मत होइए।

क्योंकि अल्लाह रब्बुल इज्जत सबको अपनी नेमतों से नवाजने वाला है।अल्लाह पर भरोसा कर आप एक बार वजीफेको करें।अल्लाह कभी भी अपने बंदों को खाली हाथ नहीं रखता। ना ही अपने बंदोंको कभी ना उम्मीद करता है।

वोही हमें दुनिया में लाया है किसी ना किसी मकसद के लिए और इंशाल्लाह वही हमारी परेशानियों को दूर करने वाला है।औलाद को हासिल करने के लिए आपको इस वजीफे को इस तरह करना है।रोजाना 3 बार दरूद इब्राहिमी पढ़ना है।

Aulad Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa

اللهصَلّعلىمُحنَدوعلىالِمُحَقَِدِكماصليتعلىإبراهيموعلىآلإبراهيم } إنكحميدمجيداللهباركعلىمحمدعلىالمکنَدِگهابارگتعلىإبراهيموعلىالابراهيمانكکويدچد

आपको तीन बार दरूदे इब्राहिम पढ़ने के बाद 101 मर्तबा सूरह कौसर पढ़नी है। انااعطيكالكوثرفصللربكاناشانئكهواكتر सूरह कौसर कुरान शरीफ के तीसरे पारे में आपको मिल जाएगी यह बहुत ही छोटी सी सूरह है।

औलाद के लिए आप सूरह कौसर के आसान से वजीफेको एक बार जरूर आजमा कर देखें।अल्लाह के फ्जलो करम से आपको जरूर कामयाबी हासिल होगी।यकीन कामिल के साथ एक बार इस वजीफे को करें।

Har insan ke dilo dimag mai koi na koi khwaish chupi rahati hai, isliye aaj hum aapko Har Khwaish Ke Liye Surah Kausar Ka Wazifa, Amal, Dua bata rahe hai.

सूरह कौसर की फजीलत


Surah Kausar Ki Tafseer Aur Fazilat

Surah Kausar chhoti si surah hai magar iski tafseer badi hi gehri aur khas maynon ki hai. Surah Kausar ke bare mein Hazrat Anas ibn Malik bayan karte hai, ke Huzur ﷺ par ek neend taari hui aur phir aap apna sir mubarak uthaya aur muskuraye, phir ya to aap ﷺ ne unse (sahaba ikram se) farmaya, ya unhone (sahabah ikram) ne aap ﷺ se kaha: aap kyon muskura rahe hain? Phir aap ﷺ ne farmaya: beshak ek surah mujhpar nazil hui hai. Phir aap ﷺ ne parha, bismillah hirrahmaan nirraheem, Inna a’atayna kal kawsar…” mukammal ayat tak.

Surah Kausar Ki Tafseer Aur Fazilat

Surah Kausar ya Surah Kawsar teen (3) ayaat par mushtamil Quran Pak ki chhoti tareen surah hai. Choonke is surah ka nuzool Makkah Shareef mein hua isliye ye Makki Surah ke taur par jaani jati hai. Surah Kausar ki tafseer bahut dilchasp hai kyunki isme ALLAH Ta’ala ne Hauz-e-Kausar (aage aap tafseelan janenge) ke bare mein tazkirah (zikr) farmaya hai. Ye bhi dekhiye→ Safar Ki Dua in Hindi Urdu Arabic English-Images

Kausar ke maane hain ‘khair-e-kaseer’ yani be-panah bhalayi. Kausar jannat ki ek nahar ka naam bhi hai aur us nehar se nikalne wale hauz ko bhi kausar kahte hain.

Hauz ki sift ke bare mein hadees ki riwayaat mein ye bhi aaya hai ke isme do parnaale aasman se girenge jo nahar kausar ke pani se hauz ko bhar denge. Iske bartan aasman ke sitaaron jitne honge. Zarur parhiye→ Surah Nasr

Ahadees Saheeha mein Hauz-e-Kausar ke pani ki safayi aur shireeni aur iske kinaaron ka jawaahraat se bhara hone ke mutalliq aise khoobiyan hain ke is duniya mein unka beshqeemti cheezon par muqabla nahi kiya ja sakta.

Surah Kausar Ka Tarjuma

Para #30 | Surah #108 | Surah Kausar

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ
اِنَّآ اَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَرَ

Inna A’atainaa-Kal Kawsara

इन्ना अ’अ-तयना कल कवसर

Beshak HAM ne Aapko kawsar ‘ata farmayi hai.

فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانْحَرْ

Fasalli Lirabbika Wan-‘Har

फ़सल्ली ली रब्बिका वन’हर

Pas apne parwardigaar ke liye namaz parha karo aur qurbani diya karo.

اِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الْاَبْتَرُ

Inna Shaani-Aka Huwal Abtaru

इन्ना शानि अ-क हुवल अब्तर

Beshak Aapka dushman hi be naam-o-nishan hai.

Surah Kausar Ka Hindi Mein Tarjuma

पारा #30 | सूरह #108 | सूरह कौसर

बेशक हमने आपको कवसर दी

पस अपने रब्ब के लिए नमाज़ पढ़े और क़ुर्बानी कीजिए

बेशक आप का दुश्मन ही बे नाम-ओ-निशान है

Surah Kausar Ki Tafseer

Shan-e-Nuzool

Ibn Abi Haatim ne Siddi se aur Bihaqqi ne Dalayel-e-Nubuwwat mein Hazrat Mu’hammad bin ‘Ali bin ‘Hussain R.A. se naqal kiya hai ke jis shakhs ki aulad-e-zakoor mar jaye usko arab abtar kaha karte the yani maqtoo-an-nasal (jiski nasal khatm ho jaye).
Jis waqt Nabi Kareem ﷺ ke sahebzaade Qasim ya Ibraheem ka bachpan mein hi intiqaal ho gaya to kuffar makkah Aap ﷺ ko abtar kah kar taana dene lage. Aisa kahne walon mein ‘Aas bin Waayel ka naam khas taur par zikr kiya jata hai. Uske samne jab Rasool ALLAH ﷺ ka zikr kiya jata to kahta tha ke unki baat chhoro. Ye kuch fikr karne ki cheez nahi. Kyunki wo abtar (maqtoo-an-nasal) hain. Jab unka intiqaal ho jayega, unka koi naam lene wala bhi na rahega. Is par Surah Kausar nazil hui.

Rawah Al-Baghwi, Ibn Kaseer wa Mazhari

Aur baz riwaiyaat mein hai ke Ka’ab bin Ashraf yahoodi ek martaba Makkah Mukarma aaya to Quresh-e-Makkah uske pas gaye aur kaha ke aap us naujwaan ko nahi dekhte jo kahta hai ke wo ham sab se (deen ke aitbaar se) behtar hai. Halanke ham hajjaaj (haj karne walon) ki khidmat karne wale aur Baitullah ki hifazat karne wale aur logon ko pani pilane wale hain. Ka’ab ne ye sunkar kaha ke nahi tum log usse behtar ho, is par ye Surah Kausar nazil hui.

Zikrahu Ibn Kaseer ‘An al-bazzaar Ba-Asnaad Saheeh Wa-Qad rawah Muslim Qaalah mazhari

Khulaasa ye hai ke kuffaar-e-makkah jo Rasool ALLAH ﷺ ke pisri aulad (bete) na rahne ke sabab (wajah se) abtar hone ke taane dete the. Ya dusri wajooh (waja se ki jama) se Aap ﷺ ki shaan mein gustaakhi karte the. Unke javab mein Surah Kausar nazil hui hai. Jis mein unke taanon ka javab bhi hai ke sirf aulad-e-narina (bete) ke na rahne se Aap ﷺ ko maqtoo-an-nasal ya maqtoo-az-zikr kahne wale haqaayeq (sachchayi) se be khabar hain. Aap ﷺ ki nasal nasbi bhi insha ALLAH duniya mein taa qayamat baqi rahegi agarchah dukhtari (beti ki) aulad se ho. Aur nasal maanwi yani Aap ﷺ par imaan lane wale musalman jo dar haqeeqat Nabi ki aulad maanwi hote hain wo to is kasrat (zyadah) se honge ke pichhle tamam Anbiya Alayhimus Salam ki ummaton se bhi barh jayenge. Aur isme Rasool ALLAH ﷺ ka ALLAH ke nazdeek maqbool aur Mukarram-o-Muazzam hona bhi mazkoor (zikr kiya gaya) hai. Jisse Ka’ab bin Ashraf ke qaul ki tardeed (nafi) ho jati hai. Ye sab mazmoon surah ki teesri ayat mein hai.

Surah Kausar Ki Ayat Number 1 Ki Tafseer
اِنَّآ اَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَرَ

Inna A’atainaa-Kal Kausara

Kausar Ek Khair-e-Kaseer (Be-Panah Bhalayi)

Imam Bukhari ne Hazrat Ibn ‘Abbas R.A. se iski tafseer mein riwayat kiya hai ke unho ne farmaya ke, “Kausar wo Khair-e-Kaseer hai jo ALLAH Ta’ala ne Aap ﷺ ko ata farmayi hai.”

Ibn ‘Abbas R.A. ke khas shaagird Sa’eed bin Jubair Ra’hmatullah ‘Alayh se kisi ne kaha ke baz log kahte hain ke Kausar jannat ki ek nehar ka naam hai. To Sa’eed bin Jubair Ra’hmatullah ‘Alayh ne javab diya ke (Ibn ‘Abbas R.A. ka qaul iske munaafi nahi balki) wo nehar-e-jannat jiska nam Kausar hai wo bhi is Khair-e-Kaseer mein dakhil hai. Isiliye Imam-e-Tafseer Mujahid ne kausar ki tafseer mein farmaya ke wo duniya aur aakhirat dono ki Khair-e-Kaseer hai. Isme jannat ki khas nehar kausar bhi dakhil hai.

Ye bhi dekhiye→ Aaina Dekhne Ki Dua When Looking into the Mirror

Hauz-e-Kausar Ka Tazkirah (Zikr)

Surah Kausar ki pahli ayat mein ALLAH Tabarak Wata ‘Ala ne Huzoor Nabi Kareem ﷺ ko Hauz-e-Kausar ata farmane ki khushkhabri sunayi hai.

Bukhari, Muslim, Abu Dawood, Nisaayi ne Hazrat Anas R.A. se riwayat kiya hai. Muslim mein bayan kiye gaye alfaz ka tarjuma ye hai:

“Ek roz jabke Rasool ALLAH ﷺ masjid mein hamare darmiyan the. Achanak Aap ﷺ par ek qism ki neend ya behoshi ki si kaifiyat taari hui. Phir hanste hue Aap ﷺ ne sar Mubarak uthaya.

Hamne puchha, ya Rasool ALLAH ﷺ! Aapke hansne ka sabab kya hai?

Tou farmaya ke Mujh par isi waqt ek Surat nazil hui hai. Phir Aap ﷺ ne bismillah ke sath Surah Kausar parhi. Phir farmaya, tum jante ho kausar kya cheez hai?

Hamne kaha, ALLAH wa Rasoolahu Aa’lam.

Aap ﷺ ne farmaya, ye ek nehar-e-jannat hai jiska Mere Rabb ne mujhse wada farmaya hai. Jisme khair kaseer hai. Aur wo hauz hai jispar meri ummat qayamat ke din pani peene ke liye aayegi. Iske pani peene ke bartan aasman ke sitaron ki taadad mein honge. Us waqt baz logon ko farishte hauz se hata denge to main kahunga ke mere Parwardigaar ye to meri ummat mein hai. ALLAH Ta’ala farmayega ke Aap nahi jante ke isne Aapke bad kya naya deen ikhtiyaar kiya hai.”

Is Hadees-e-Mubarika se is surah ka sabab-e-nuzool (nazil hone ko wajah) bhi malum hua aur lafz kausar ki sahee tafseer bhi. Yani khair kaseer, aur ye bhi ke is khair kaseer mein Hauz-e-Kausar bhi shamil hai jo qayamat mein Ummat-e-Mu’hammadiya ko sairaab (pani pilayegi) karegi. Neez is riwayat ne ye bhi wazeh kar diya hai ke asal nehar kausar jannat mein hai aur ye Hauz-e-Kausar maidan-e-hashr mein hogi. Isme do parnaalon (naaliyon) ke zariya nehar kausar ka pani dala jayega. Isme un riwaiyaat ki bhi tatbeeq (laagu) ho gayi jinse malum hota hai ke Hauz-e-Kausar par ummat ka darood dakhool (dakhila) jannat se pahle hoga, aur is Hadees mein jo baz logon ko Hauz-e-Kausar se hata dene ka zikr hai, wo log hain jo bad mein Islam se phir gaye ya pahle hi se musalman nahi the. Magar munaafiqaana (jhoota) izhaar-e-islam karte the. An-‘Hazrat ﷺ ke bad unka nafaaq (asliyat) khul gaya. wALLAHu A’alam.

Siffaat-e-Hauz-e-Kausar (Hauz-e-Kausar Ki Khoobiyan)
Nehar-e-Jannat Se Girte Do Parnaale

Ibn Kaseer ne upar bayan ki gayi riwayat ko naqal karke mazid likha hai jiske alfaz ka tarjuma ye hai:

“Hauz ki sift mein riwaiyaat-e-hadees mein aaya hai ke isme do parnaale aasman se girenge jo nehar kausar ke pani se hauz ko bhar denge. Iske bartan aasman ke sitaaron ki taadad mein honge.”

Shahad Se Zyadah Meethi Aur Doodh Se Zyadah Safed Nehar

Ahadees Saheeha mein Hauz-e-Kausar ke pani ki safayi aur shireeni aur iske kinaaron ka jawaahraat se marassa (bhara) hone ke mutalliq aise ausaaf (khoobiyan) mazkoor hain ke duniya mein unka kisi cheez par qayaas (andaza) nahi kiya ja sakta.

Masnad ki aur Hadees mein hai ke Huzoor ﷺ ne is ayat ki tilawat karke farmaya ke, “Mujhe Kausar inayat ki gayi hai jo ek jaari (chalti) nehar hai lekin ghada nahi hai. Iske dono jaanib (taraf) moti ke khaime hain. Iski mitti khaalis mushk hai. Iske kankar bhi suchche moti hain.”

Aur riwayat mein hai ke, “Meraaj wali raat Aap ﷺ ne aasman par jannat mein is nehar ko dekha aur Jibreel A.H. se puchha ke ye konsi nehar hai. Tou Hazrat Jibreel A.H. ne farmaya ke ye Kausar hai jo ALLAH Ta’ala ne Aapko de rakhi hai.”
Aur is qism ki bahut si hadeesein hain.

Ek aur Hadees mein hai ke, “Iska pani doodh se zyadah safed hai aur shahad se zyadah meetha hai. Jiske kinaare daraaz (lambi) gardan wale parinde baithe hue hain. Hazrat Siddeeq R.A. ne sunkar farmaya, wo parinde to bahut hi khoobsurat honge. Aap ﷺ ne farmaya, khane mein bhi wo bahut lazeez (mazedaar) hain.”

Surah Kausar Ki Ayat Number 2 Ki Tafseer
فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانْحَرْ

Fasalli Lirabbika Wan-‘Har

An-‘har, nahar se mushtaq, oont ki qurbani ko nahar kaha jata hai jiska masnoon tareeqa uska poan bandh kar hulqoom (galaa) mein nezah ya chhuri maar kar khoon baha dena hai. Jaisa ke gaye, bakri waghairah ka zibah karne ka tareeqa hai yani janwar ko lita kar hulqoom par chhuri pherna hai.

Arab mein chunke amooman (aam taur par) qurbani oont ki hoti thi, isliye qurbani karne ke liye yahan lafz wan-‘har istemal kiya gaya. Baz auqaat lafz nahar mutallaqan qurbani ke maani mein bhi istemal hota hai. Is Surah ki pahli ayat mein kuffar ke zaame baatil (ghalat ya jhoot) ke khilaf Rasool ALLAH ﷺ ko Kausar yani duniya aur aakhirat ki har khair aur wo bhi kaseer miqdar mein ata farmane ki khushkhabri sunane ke bad uske shukr ke taur par Aap ﷺ ko do cheezon ki hidayet ki gayi hai.

Namaz badni aur jismani ibadaton mein sab se badi ibadat hai aur qurbani maali ibadaton mein is bina par khas imtiyaaz aur ahmiyat rakhti hai ke ALLAH ke naam par qurbani karna but parasti (buton ki pooja) ke shuaar (reeti-riwaz) ke khilaf ek jahaad bhi hai. Kyunke unki qurbaniyan button ke naam par hoti thein.

Isiliye Quran Kareem ki ek aur ayat mein bhi namaz ke sath qurbani ka zikr farmaya hai.

اِنَّ صَلاَتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي ِﷲِ رَبِّ الْعَالَمِينَ

Is ayat mein wan-‘har ke maane qurbani hona Hazrat Ibn Abbaas R.A., Ata, Mujahid aur Hasan Basri waghairah se mustanid riwaiyaat mein sabit hai. Baz logon ne jo wan-‘har ke maane namaz mein seena par hath bandhne ke baz Aayema-e-tafseer (tafseer likhne walon) ki taraf mansoob kiye hain. Uske mutalliq ibn Kaseer ne farmaya ke riwayet munkar (naqabl-e-aitbar) hai.

Surah Kausar Ki Ayat Number 3 Ki Tafseer

اِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الْاَبْتَرُ

Inna Shaani-Aka Huwal Abtaru

Is ayat mein ALLAH Tabarak Wata ne ‘Ala ne Huzoor Pak ﷺ ke dushmano ko javab diya hai ke wo hi na-murad honge.

‘Shani’ ke maane bughz rakhne wale, aib lagane wale ke hain. Ye ayat un kuffaar ke mutalliq nazil hui hai. Jo Huzoor Pak ﷺ ko abtar maqtoo-an-nasal hone ka taana dete the. Aksar riwaiyaat mein ‘Aas bin Waayel, baz mein ‘Uqbah, baz mein Ka’ab bin Ashraf iske misdaaq (jiske zariye kisi cheez ko sabit kiya ja sake) hain. ‘Haq Ta’ala ne Rasool ALLAH ﷺ ko kausar yani Khair-e-Kaseer ata ki jisme aulad-e-kaseer (ummat) bhi dakhil hai. Aap ﷺ ke liye aulad ki kasrat is lehaz se hai ke nisbi aulad bhi aapki masha ALLAH kuch kam nahi. Aur Paighambar chunke puri ummat ka baap hota hai aur puri ummat uski roohani aulad hoti hai. Aur Aap ﷺ ki ummat pichhle tamam Anbiya ki ummaton se taadad mein zyadah hogi. Ek taraf to un dushmano ki baat ko is tarah khaak mein mila diya. Dusri taraf ye bhi farma diya ke jo log aapko abtar hone ka taana dete hain wo khud hi abtar hain.

Khulaasa-e-Tafseer

Beshak Hamne aapko kausar (jannat ki ek hauz ka naam bhi hai aur har khair kaseer bhi isme shamil hai) ata farmayi hai (jisme duniya aur aakhirat ki har khair wa bhalayi shamil hai. Duniya mein deen islam ki baqa-o-salaamti aur aakhirat mein jannat ke darjaat-e-aaliya sab dakhil hain). Sau (in nematon ke shukr mein) aap apne parwardigaar ki namaz parhiye. (Kyunki sabse badi nemat ke shukr mein sabse badi ibadat honi chahiye aur wo namaz hai.) Aur (takmeel-e-shukr ke liye jismaani ibadat ke sath-sath maali ibadat yani Usi ke naam ki) qurbani kijiye. Jaisa dusri aayeton mein amooman namaz ke sath zakat ka hukm hai. Isme zakat ke bajaye qurbani ka zikr shayed isliye ikhtiyaar kiya gaya ke qurbani mein maali ibadat hone ke ilawa mushrakeen aur mushrikaana rasoom (rasmon) ki amli mukhalfat bhi hai. Kyunki mushrakeen button ke naam ki qurbani kiya karte the.

Aage An-‘Hazrat ﷺ ke sahebzaade Qasim ki bachpan mein wafat par baz mushrakeen ne jo ye taana diya ke unki nasal na chalegi aur unke deen ka silsila jald khatm ho jayega. Iska javab hai ke Aap ﷺ bafazl-e-Ta’ala (ALLAH ke fazal se) be naam wa nishan nahi hain balki bil-yaqeen Aapka dushman hi be naam wa nishan hai (khawah zaheri nasal us dushman ki chale ya na chale lekin duniya mein uska zikr khair baqi nahi rahega. Bakhilaaf Aapke ke Aapki ummat aur Aapki yaad nek naami, muhabbat wa aitqaad (sach ke yaqeen) ke sath baqi rahegi. Aur ye sab nematen lafz Kausar ke mafhoom mein dakhil hain. Agar pisri aulad ki nasal na ho to na sahi, jo nasal se maqsood (gharaz) hai wo Aapko hasil hai yahan tak ke duniya se guzar kar aakhirat tak bhi, aur dushman is se mahroom hai).

Ibrat (Sabaq)
Ab ghaur kijiye ke Rasool-e-Maqbool ﷺ ke zikr ko ‘Haq Ta’ala ne kaisi rafaat (izzat) aur azmat ata farmayi ke Aap ﷺ ke ahd-e-mubarak (zamana) se aaj tak poori duniya ke chappa chappa (kona-kona) par Aap ﷺ ka naam mubarak panch waqt ALLAH ke naam ke sath meenaron par pukaara jata hai. Aur aakhirat mein Aap ﷺ ko Shifaat-e-Kubra ka Muqam-e-Mahmood hasil hoga. Iske bil-muqabil (muqable mein) duniya se puchiye ke ‘Aas bin Waayel, ‘Uqbah aur Ka’ab ki aulad kahan aur unka khandan kya hua, khud unka naam bhi islami riwaiyaat se tafseer-e-ayaat ke zel mein mahfuz ho gaya. Warna duniya mein aaj unka naam lene wala koi baqi nahi hai.

Fa’atabiroo Ya Oolil-Absaari

Surah Kausar Ki Fazilat


Quran-e-pak ka kasrat se wird karne wale ke dilon ko sukoon, mareezon ko shifa, musibat zadon ko asani ALLAH ata farmata hai. Quran e pak ki surah ko parhne wale se ALLAH razi hota hai. Mushkilaat aasaniyon mein badal jati hain. Masaib hal ho jate hain.

ALLAH aapko Surah Kausar parhne se faizyaab (fayedah mand) kare.

Rasool ALLAH ﷺ Ka Ham-Nasheen
Surah Kausar ki tilawat ki fazilat ke bare mein aaya hai ke,
“Jo shakhs panjgaanah (5 waqt ki) namaz mein is surah ki tilawat kare. Tou qayamat ke din Hauz-e-Kausar se seraab aur darakht toobi ke saye mein Rasool-e-Khuda ﷺ ka ham-nasheen (saathi) hoga.”

Is tarah bhi aaya hai ke:

Abu Baseer Imam Saadiq Radi ALLAHu ‘Anhu se naqal karte hain,

“Jo shakhs apni yaumiya namazon mein Surah Kausar ki tilawat karta hai, usay qayamat ke din Hauz-e-Kausar naseeb hogi aur wo darakht toobi ke saye mein Rasool-e-Khuda ﷺ ka ham-nasheen hoga.”

Majm’a-ul-bayan mein Paighambar-e-Akram ﷺ se riwayat karte hain:

“Jo shakhs Surah Kausar ki tilawat karta hai, ALLAH Ta’ala usay bahisht ki nehron se seraab karega aur eid-e-qurban ke din musalmano ki taraf se zibah karne wali qurbani neez ahl-e-kitab aur mushrakeen ki taraf se pesh kardah qurbani ke barabar usay savab diya jayega.”

Dili Tamanna Ki Takmeel
Surah kausar ko ek sau untees (129) bar parhne se jayaz niyyat rakhne wale ki dili tamanna poori hoti hai.

Dushman Se Nijat

Koi dushman aapko bahut tang kar raha ho aur usse aapki jaan ka khatra ho to rozana panch waqt ki namaz ke bad kam se kam terah (13) martaba Surah Kausar ki tilawat kijiye. Phir dushman ke shar se hifazat ke liye ALLAH Ta’ala se dua kijiye. Insha ALLAH, ALLAH aapko apni khas hifazat mein le lega aur dushman se hamesha ke liye jaan khalaasi/nijat hogi.

Rizq Mein Be-Tahaasha Izafa Aur Khair-o-Barkat

Agar apne paise rakhne ki jagah makhsoos kar lee jaye. Jaisa ke almari ka ek khas khana, purse ya kapre ki ek potli le len. Jab bhi isme paise rakhen ya nikalen to har bar Bismillah Shareef ke sath Surah Kausar ek (1) martaba parhkar us khane, purse ya potli par dam kar dijiye. Jab-jab paise nikalne hain ya rakhne hain, har bar aise hi surah parhkar dam karna hai. ALLAH ka ye kalam jiske fawaid kaseer (behad zyadah) hain, jab parhkar phoonka jaye to kaise na rizq kaseer hoga. Yaqeenan khoob kaseer hoga. Daulat mejn be-panah izafa hoga aur be-shumaar khair-o-barkat bhi hogi.

To phir aaj hi se Surah Kausar ki tilawat ka mamul banaiye aur iske be-tahaasha (bahut zyadah) fazayel aur barkaat hasil kijiye.